देवलापार में पहली ग्रामायण गोमय कार्यशाला

देवलापार में पहली ग्रामायण गोमय कार्यशाला आयोजित की गई. इस कार्यशाला में संपूर्ण महाराष्ट्र से महिला-पुरुषों ने भाग लिया था. विगत वर्ष गोमय गणेश बनाने की कार्यशाला ली गई थी. इससे भी कुछ लोगों को प्रेरणा मिली. इसके पश्चा‍त‍् लोगों के अनुरोध पर नेत्रवन में तीसरी गोमय कार्यशाला का आयोजन किया गया. उसमें बेंगलुरू से एक दंपति विमान से आए थे. महाराष्ट्र के भिन्न-भिन्न स्थानों के लोग उनके यहां कार्यशाला आयोजित करने की ग्रामायण से मांग करते रहते हैं. इस वर्ष पुन: गोमय गणेश निर्माण तथा गणेशजी की मूर्ति का रंगरोगन, ऐसी 2 कार्यशालाएं ली गईं. इसके साथ ही विभिन्न प्रदर्शनियों में इन वस्तुओं को बिक्री व लोगों के देखने के लिए रखना, प्रत्येक कार्यक्रम में इन वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाना, गोबर से अथवा गोमय से इतनी सुंदर व भिन्न-भिन्न वस्तुएं बनाई जा सकती हैं, यह विश्वास लोगों के मन में उत्पन्न करना तथा ऐसी वस्तुएं बनाकर हम उनकी बिक्री कर सकते हैं, उससे हमें 4 पैसे मिल सकते हैं, यह विश्वास व्यावसायिक, उद्योजक, महिला, किसान गोपालक में उत्पन्न करना आदि प्रयास जारी थे.यह करने के दौरान ही गोमय से विभिन्न वस्तुएं बनानेवाले एक स्थायी प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत महसूस हुई. साथ ही यह भी ध्यान में आया कि हाथ से बनाई गई वस्तुएं, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन तथा विभिन्न मशीनें लगाकर उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस दिशा में भी कुछ करने की आवश्यकता है. इन सभी बातों का विचार कर यह तय किया गया कि एक ऐसा स्थायी प्रकल्प साकार किया जाए, जो वस्तुएं बनाएगा तथा साथ ही एक ऐसा केंद्र बनाया जाए कि जब जिसे जरूरत हो, वह इस केंद्र में आकर गोमय वस्तु निर्माण का प्रशिक्षण ले सके तथा इससे गोमय कौशल विकास की संकल्पना भी साध्य हो. नागपुर से पास ही बुटबोरी-उमरेड रोड पर स्थित निसर्ग विज्ञान मंडल संस्था के प्रकल्प के स्थान पर यह प्रकल्प शुरू करने का निश्चय किया गया. हमने इस प्रकल्प के लिए लगभग 1 लाख रुपये कीमत की मशीनें बनवाकर वहां लगवाईं. आज हम इस ग्रामायण गोमय कौशल विकास प्रशिक्षण व निर्माण केंद्र का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं. केंद्र के उद्‍घाटन से पहले ही हम लगभग 15,000 गोमय दीये बना चुके हैं. इनमें से 1,000 अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय श्रद्धा को तथा पुणे की एक महिला उद्योजक को 5,000 दीये दे रहे हैं.इस बार दिवाली तक कम से कम सवा लाख दीये बनाने का संकल्प किया गया है. इस प्रकल्प के माध्यम से वर्तमान में 19 महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है तथा और एक-दो गांवों में महिलाओं का समूह यह कार्य करने का इच्छुक है.इस केंद्र में वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. वस्तु बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल, उसका कौशल भी सिखाया जाएगा तथा महिलाओं द्वारा बनाई गई वस्तुएं खरीदने की भी व्यवस्था होगी. गोमूत्र खरीदा जाएगा. गोबर के कंडे खरीदे जाएंगे. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों में यह विश्वास उत्पन्न होगा कि ये चीजें मूल्यवान हैं. इसी के साथ शहरों में बिक्री केंद्र श्रृंखला तैयार करने की भी योजना है. हमारा ऐसा मानना है कि शहर में रहने वाले लोगों को भी गोबर से बनी वस्तुएं बड़े पैमाने पर खरीदनी चाहिए. इसी के साथ इस बिक्री तंत्र में आप जो भी सहयोग दे सकते हैं, वह भी अवश्य दिया जाना चाहिए. औपचारिक व अनौपचारिक दोनों प्रकार के मार्केट में गोमय उत्पादन किस प्रकार अपनी जगह बनाएं, प्रोफेशनल तरीके से हम इस दिशा में कार्य करने का प्रयास करेंगे. इस संदर्भ में आप सभी के सुझावों व सूचनाओं के साथ ही आपके सहयोग का भी स्वागत है. हमें विश्वास है कि आप सभी के आशीर्वाद व शुभकामनाओं के बल पर यह कार्य आगे भी बढ़ेगा और सफल भी होगा. हम पर अपना स्नेह सदैव बना रहे

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